रक्तचाप ब्लडप्रेशर Blood pressure

रक्तचाप ब्लडप्रेशर Blood pressure

रक्तचाप ब्लडप्रेशर Blood pressure

 

पहला प्रयोगः निम्न रक्तचाप (Low Blood Pressure) तथा उच्च रक्तचाप (High B.P.) वास्तव में कोई रोग नहीं है अपितु शरीर में अन्य किसी रोग के लक्षण हैं। निम्न रक्तचाप में केवल ॐ…का उच्चारण करने से तथा 2 से 5 ग्राम पीपरामूल का सेवन करने से एवं नींबू के नमक डाले हुए शर्बत को पीने से लाभ होता है।
उच्च रक्तचाप में ॐ शांतिमंत्र का जप कुछ भी खानेपीने से पहले एवं बाद में करने से तथा बारहमासी के 11 फूल के सेवन से लाभ होता है।
दूसरा प्रयोगः रतवेलिया (जलपीपली) का 5 ग्राम रस दिन में एक बार पीने से उच्च रक्तचाप नियंत्रित होता है। यह रतवा में भी लाभदायक है।
तीसरा प्रयोगः लहसुन की कलियों को चारपाँच दिन में धूप में सुखाकर काँच की बरनी में भरकर ऊपर से शहद डालकर रख दें। पंद्रह दिन के बाद लहसुन की एकदो कली को एक चम्मच शहद के साथ चबाकर एक गिलास ठंडा दूध पीने से (जो कि फ्रीज में रखकर ठंडा न किया हो) रक्तचाप (ब्लडप्रेशर) सामान्य रहता है।
चौथा प्रयोगः 1 ग्राम सर्पगंधा बूटी को 2 ग्राम बालछड़ बूटी में मिलाकर दें। चन्द्रकला रस की 2-2 गोली सुबहशाम दे। 2 चम्मच त्रिफला चूर्ण रात्रि को सोते समय दें। अगर वातप्रधान प्रकृति है तो प्रातः तिल का 20 मि.ली. तेल गर्म पानी के साथ दें। इससे उच्च रक्तचाप (H.B.P.) में लाभ होता है।
चेतावनीः हररोज बी.पी. की गोलियाँ लम्बे समय तक खाते रहने से लीवर और किडनी खराब होने की संभावना रहती है।

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