पाचन की तकलीफों में परम हितकारी अदरक part 1

जोड़ों का दर्दः 2 चम्मच अदरक रस में 1-1 चुटकी सेंधा नमक व हींग मिला के मालिश करें।
गठियाः 10 ग्राम अदरक छील के 100 ग्राम पानी में उबाल लें। ठंडा होने पर शहद मिलाकर पियें। कुछ दिन लगातार दिन में एक बार लें। यह प्रयोग वर्षा या शीत ऋतु में करें।
पाचन की तकलीफों में परम हितकारी
अदरक
आजकल लोग बीमारियों के शिकार अधिक क्यों हैं ? अधिकांश लोग खाना न पचना, भूख न लगना, पेट में वायु बनना, कब्ज आदि पाचन सम्बंधी तकलीफों से ग्रस्त हैं और इसी से अधिकांश अन्य रोग उत्पन्न होते हैं। पेट की अनेक तकलीफों में रामबाण एवं प्रकृति का वरदान है अदरक। स्वस्थ लोगों के लिए यह स्वास्थ्यरक्षक है। बारिश के दिनों में यह स्वास्थ्य का प्रहरी है।
सरल है आँतों की सफाई व पाचनतंत्र की मजबूती
शरीर में जब कच्चा रस (आम) बढ़ता है या लम्बे समय तक रहता है, तब अनेक रोग उत्पन्न होते हैं। अदरक का रस आशामय़ के छिद्रों मे जम कच्चे रस एवं कफ को तथा बड़ी आँतों में जमें आँव को पिघलाकर बाहर निकाल देता है तथा छिद्रों को स्वच्छ कर देता है। इससे जठराग्नि प्रदीप्त होती है और पाचन तंत्र स्वस्थ बनता है। यह लार एवं आमाशय का रस दोनों की उत्पत्ति बढ़ाता है, जिससे भोजन का पाचन बढ़िया होता है एवं अरूचि दूर होता है।
आसान घरेलु प्रयोग
स्वास्थ्य व भूख वर्धक, वायुनाशक प्रयोग
रोज भोजन से पहले अदरक को बारीक टुकड़े-टुकड़े करके सेंधा नमक के साथ लेने से पाचक रस बढ़कर अरूचि मिटती है। भूख खुलती है, वायु नहीं बनती व स्वास्थ्य अच्छा रहता है।
रूचिकर, भूखवर्धक उदररोगनाशक प्रयोग
100 ग्राम अदरक की चटनी बनायें एवं 100 ग्राम घी में सेंक लें। लाल होने पर उसमें 200 ग्राम गुड़ डालें एवं हलवे की तरह गाढ़ा बना लें। (घी न हो तो 200 ग्राम अदरक को कद्दूकश करके 200 ग्राम चीनी मिलाकर पाक बना लें।) इसमें लौंग, इलायची, जायपत्री का चूर्ण मिलायें तो और भी लाभ होगा। वर्षा ऋतु में 5 से 10 ग्राम एवं शीत ऋतु में 10-10 ग्राम मिश्रण सुबह-शाम खाने से अरुचि, मंदाग्नि, आमवृद्धि, गले व पेट के रोग, खाँसी, जुकाम, दमा आदि अनेक तकलीफों में लाभ होता है। भूख खुलकर लगती है। बारिश के कारण उत्पन्न बीमारियों में यह अति लाभदायी है।

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