पत्थरी की चिकित्सा

पत्थरी की चिकित्सा – गुर्दे की व मूत्राशय की
1- कुलत्थी की दाल- यह दाल सभी आयुर्वेदिक दवाइयों की दुकान पर आसानी से मिल जाती है। जिसे भी पत्थरी है या गुर्दे ने दर्द है वह यह दाल का प्रयोग करे। प्रयोग का तरीका – लगभग 50 ग्राम कुलत्थी की दाल को साफ करके रात को पानी मे डाल दे। सुबह धोकर 250 ग्राम साफ पानी मे उबाले। जब दाल अच्छी तरह पाक जाए तो उसमे से 100 ग्राम पानी अलग कर ले। यह पानी पत्थरी की दवा लेने के काम आएगा। बाकी दाल को तड़का (छौंक) लगाकर सामान्य दाल की तरह खाए। यह दाल पत्थरी के लिए बहुत गुणकारी है। केवल यह दाल खाने से ही पत्थरी निकल जाती है व गुर्दे का दर्द दूर हो जाता है। कभी कभी खाने से गुर्दे मे पत्थरी नहीं होती। यह दाल अकेली भी ले सकते हैं व दूसरी दवाइयों के साथ भी। कोई नुकसान नहीं करती।
2- कुलत्थी के पानी के साथ (जो कुलत्थी की दाल पकाने के बाद निकाला था) अश्मरीहर रस (स्वामी रामदेव की दुकान से ) आधा ग्राम ले।
3- जो कड़वी दवाई ले सकते हैं वह अश्मरीहर क्वाथ (स्वामी रामदेव) का प्रयोग करे। प्रयोग विधि पैकिंग पर लिखी हुई होती है।
4- होमियोपैथी की दुकान से गोखरू का मदर टिंक्चर की बड़ी बोतल 100 ग्राम की खरीद ले। यह TRIBULUS Q या GOKHARU Q के नाम से मिलती है। 20-20 बूंद दिन मे 3-4 बार आधा कप पानी मे मिलाकर ले। 100% हानिरहित दवाई है। केवल लाभ करती है। रास्ते मे दुकान पर ऑफिस मे कहीं भी प्रयोग कर सकते हैं। न केवल पत्थरी को नष्ट करती है बल्कि गुर्दे की सभी बीमारियों को जड़ से ठीक कर देती है। स्वास्थ सुधारती है। किसी भी किस्म की कमजोरी को दूर करती है। पेशाब मे सफ़ेद गाढ़ा पदार्थ जाना, पेशाब मे खून आना, शीघ्रपतन व मर्दाना कमजोरी को दूर करती है।
4- त्रिविक्रम रस ( आयुर्वेद की दूकान से मिल जाएगा) 1 चने के समान दिन में 2 बार 1 चम्मच शहद से लें. खाली पेट ना लें.
5- यवक्षार 10 ग्राम + हजरुल यहूद भस्म ( बेर पत्थर भस्म) 20 ग्राम . मिला लें. 1 ग्राम दिन में 3 बार पानी से लें.

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